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भोपाल की 7 सीटें… अब मैदान में 111 उम्मीदवार, हुजूर में डागा हटे, लेकिन बैरसिया में रत्नाकर डटे

भोपाल. नाम वापसी के आखिरी दिन भोपाल की 7 विधानसभाओं से 23 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन फार्म वापस ले लिए। अब इन सीटों पर कुल 111 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इसमें 47 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। बैरसिया में भाजपा के बागी ब्रह्मानंद रत्नाकर मैदान में डटे हुए हैं। हुजूर से भाजपा के जितेंद्र डागा ने नाम वापस लेकर पार्टी की मुश्किलें कम की हैं।
दरअसल, जिले की 7 विधानसभाओं में चुनाव लड़ने के लिए 158 उम्मीदवारों ने नामांकन फॉर्म जमा किए थे। जिसमें से 26 नामांकन रद्द हो गए। 130 उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए थे। बुधवार को नाम वापसी के आखिरी दिन 23 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन फार्म वापस ले लिया है। इसके बाद मैदान में अब 111 उम्मीदवार शेष रह गए हैं।

नरेला में निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा, दो बार कराना पड़ी लॉटरी : नरेला विधानसभा में निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा होने के चलते कई उम्मीदवारों ने एक ही चुनाव चिन्ह नामांकन फॉर्म में भर दिए थे। इसलिए रिटर्निंग ऑफिसर मुकुल गुप्ता ने पर्ची के जरिए लॉटरी कर उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए। देर रात तक नरेला विधानसभा के लिए उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह आवंटन की प्रक्रिया चलती रही।

नरेला, गोविंदपुरा और दक्षिण-पश्चिम में लगेंगी दो-दो बैलेट यूनिट : ईवीएम की बैलेट यूनिट में 16 बटन होते हैं, जिसमें एक नोटा भी शामिल है। इस हिसाब से एक मशीन में 15 उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिन्ह सैट किए जा सकते हैं। ऐसे में इन तीनों विस में दो-दो बैलेट यूनिट लगाना पड़ेंगी।

निर्दलीय उम्मीदवारों को मिले चिन्ह : नाम वापसी के साथ रिटर्निंग अधिकारियों ने उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह भी आवंटित कर दिए हैं। रजिस्टर्ड राजनैतिक दलों को छोड़कर अन्य पार्टी और निर्दलीयों को अपनी पसंद के चुनाव चिन्ह आवंटित किए गए हैं। सातों विस में 49 निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह दिए गए हैं, जबकि अन्य पार्टियों के उम्मीदवारों को भी चुनाव चिन्ह दिए गए हैं।

नामांकन वापस लेने आखिरी समय पर पहुंचे डागा : डागा को मनाने के लिए बुधवार सुबह हुजूर से बीजेपी के प्रत्याशी रामेश्वर शर्मा डागा हाउस पहुंचे। दोपहर में मुख्यमंत्री निवास पर डागा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय से मुलाकात के बाद हुजूर रिटर्निंग ऑफिसर राजकुमार खत्री के दफ्तर 2 बजकर 55 मिनट पर दौड़ते भागते पहुंचे। यहां पर उन्होंने नामांकन फॉर्म वापसी के लिए आवेदन दिया। लोगों को उनके आने की भनक न लगे। इसलिए खुद की गाड़ी से नहीं आए। अपने परिचित की गाड़ी से जिला पंचायत दफ्तर के पास उतरे।

…नहीं माने रत्नाकर, सांसद के आने की भनक लगी तो मोबाइल बंद कर जनसंपर्क पर निकल गए

बैरसिया से बीजेपी के बागी और पूर्व विधायक ब्रह्मानंद रत्नाकर के घर सांसद आलोक संजर और जिला पंचायत अध्यक्ष मनमोहन नागर मनाने के लिए पहुंचे। इसकी भनक पहले से रत्नाकर को लग गई, इसलिए वो अपने समर्थकों के साथ जनसंपर्क पर निकल गए और मोबाइल बंद कर लिया। सांसद ने रत्नाकर के परिजनों को उन्हें चुनाव नहीं लड़ने की सलाह दी। इस पर परिजनों ने सांसद से कहा कि पार्टी पर भरोसा था कि सही उम्मीदवार को टिकट दिया जाएगा। जो नहीं हुआ। जनता की डिमांड पर चुनाव मैदान में रत्नाकर को उतारा है। रत्नाकर के नामांकन पत्र वापस नहीं लेने के बाद बैरसिया में बीजेपी के विष्णु खत्री, कांग्रेस की जयश्री हरिकरण और रत्नाकर के बीच त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है।

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