लॉक डाउन में पान कृषको के सामने रोजी रोटी का संकट

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बिना कोई शासकीय मदद के वर्षों से की जा रही पान की खेती
मुकेश अवस्थी। “पान लवो की शान” ये कहावत तो हर किसी ने सुनी होगी , लेकिन शायद ही किसी को पान उगाने की पद्धति और पान को उगाने वालो के बारे ने कोई जानकारी होगी । मूलतः उत्तर प्रदेश के महोबा बाँदा , हमीरपुर , कानपुर ,बनारस , इलाहाबाद सहित मध्य प्रदेश के नरसिहपुर , होशंगाबाद , सिवनी , जबलपुर , सागर , दमोह कटनी सतना आदि में निवास करने वाली चौरसिया समाज के लोग ही पान उगाने के काम को पीढ़ियों से करते आ रहे है। जिनके सामने अब पान की बिक्री बन्द हो जाने के चलते संकट मंडरा रहा है। सरकार भी पान की खेती करने वालो को किसी तरह की सहायता आदि उपलब्ध नही कराती है , ऐसे में लोग अब पान सड़ने के बाद सरकार की तरफ उम्मीद लगाए हुए है।
बता दे कि देश भर के करोड़ो लोगो के मुंह की शान ” पान” उगाने वाले अब खुद संकट में है। पान बरेजों में लगे पान जो लगातार तोड़े जाते थे , बिक्री बन्द होने के कारण पान बेलो में ही लगे लगे सड़ रहे है , तो लॉक डाउन शुरू होने के समय बिक्री के लिये रखा लाखो कीमत का पान सड़ चुका है। ऐसे में पान कृषक बिना सरकारी मदद के की जाने वाली खेती को लेकर चिंतित है साथ ही वे घर चलाने के लिये भी परेशान होने लगे है। पान बरेजों को बनाने में सिर्फ शासन स्तर पर बांस ही सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाते है, उसके अलावा शासन स्तर और कोई सहायता नही दी जाती। मध्यप्रदेश में चौरसिया समाज पिछले सालों से पान विकास निगम बनाने की मांग सरकारों से करती आ रही है लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है ।

बिक्री न होने के चलते सड़ गया पान

बता दे कि देश भर में कलकत्ता , मद्रास , मीठी पत्ती , कपूरी सहित बंगला पान की मांग सबसे ज्यादा है जिनमे बंगला पान सहित मीठी पत्ती पान को मध्य प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश में उगाया जाता है।

चौरसिया समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले युवक शरद चौरसिया ने बताया कि लॉक डाउन में अब पान उगाने वाली चौरसिया समाज के अधिकांश लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है। फिर भी पान कृषक पान की खेती को संभालने की भरषक प्रयास कर रहे है, बता दे कि पान की बिक्री अचानक बन्द होने के कारण थोक व्यापारी के पास रखा पान सड़ चुका है जिससे लाखो का नुकसान हो गया है साथ ही पान बरेजों से लगातार टूट कर बाजार पहुचने वाला पान भी अब बिक्री नही होने के चलते तोड़ा नही जा रहा है ऐसे में बेल में लगा हुआ पान भी खराब होने की स्थिति में है। जिसकी देखभाल भी लगातार करना पड़ रहा है ,लोगो का कहना है कि कोरोना के संकट के कारण लॉक डाउन तो किया लेकिन सरकार की नजर से नदारद पान की खेती करने वालो का ख्याल किसी को नही है। दरअसल पान कृषि को सरकार द्वारा उद्यानिकी विभाग में शामिल किया गया है लेकिन इसके लिये किसी प्रकार की कोई मदद नही दी जाती । लोगो ने कोरोना के संकट के समय घर मे बैठे पान व्यापारियों सहित पान कृषको को सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।