Twinkle Dagre की मां का खुलासा, पूर्व भाजपा विधायक ने दी थी धमकी

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इंदौर। ट्विंकल डागरे हत्याकांड( Twinkle Dagre Murder Case) में पुलिस की कार्रवाई से नाराज परिजन ने पांच जिम्मेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसके माता-पिता का कहना है कि वे जब न्याय की गुहार लेकर पूर्व मुख्यमंत्री से मिलने गए थे, तब भाजपा के पूर्व विधायक ने उन्हें धमकाया था। मामले की जांच कर रहे दो तत्कालीन टीआई आरोपितों को पूछताछ के लिए बुलाते तो सीएसपी थाने पहुंचकर हत्यारों को पूछताछ किए बिना ही भगा देते थे।

एक साल पहले बेटी के साथ हुई घटना के सबूत पुलिस को सौंप दिए थे, लेकिन अधिकारियों ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। सच साबित करने के लिए बच्चों के सिर पर हाथ रखकर कसम खाई। फिर भी पुलिस को यकीन नहीं हुआ।

बाणगंगा थाना क्षेत्र के फ्रीगंज में रहने वाली ट्विंकल पिता संजय डागरे दो साल पहले अचानक गायब हो गई थी। पुलिस को अचानक कुछ दिन पहले साक्ष्य मिले और सांवेर रोड फैक्टरी के पास गड्ढा खोदकर ट्विंकल से कपड़े, बिछिया, पैंडल और गला घोटने के लिए इस्तेमाल की गई रस्सी जब्त कर ली। संदेहियों को पूछताछ के लिए बुलाया। नौकर बंटी और लखन की गवाही के बाद आरोपित जगदीश करोतिया, उसके बेटे अजय, विजय, विनय और अजय के दोस्त नीलू को गिरफ्तार कर लिया।

सोमवार को ट्विंकल की मां रीटा और पिता संजय ने भाजपा के पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता और सीएसपी अजय जैन पर दबाव बनाकर कार्रवाई नहीं होने देने के आरोप लगाए। जांच के दौरान थाने में पदस्थ रहे तत्कालीन टीआई तारेश सोनी और विनोद दीक्षित पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया। दंपती का आरोप है कि इनमें से कोई भी जिम्मेदार पहल करता तो जांच समय पर पूरी हो जाती। आरोपित पहले ही गिरफ्तार हो जाते लेकिन पुलिस के पास सबूत होने के बाद भी दबाव में मामले का टालती रही।

सीएम से नहीं मिलने दिया, हाथ पकड़कर धमकाया

रीटा का आरोप है कि एक साल पहले से वह सबूत लेकर न्याय के लिए घूम रही थी। बेटी के गुम होने के कुछ दिन बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इंदौर आए थे। उनसे मिलने के लिए वह पति के साथ एयरपोर्ट पर गई थी। वहां उन्हें तत्कालीन विधायक सुदर्शन गुप्ता ने धमकाया था कि अगर उसका नाम केस में आएगा तो ठीक नहीं होगा। पुलिस अधिकारियों को भी गुप्ता की शिकायत की थी लेकिन सत्ता में होने के कारण पुलिस ने शिकायत को अनसुना कर दिया। बेटी के गुम होने की जांच के लिए वे दो बार सीएम हाउस भी गए थे।

लोकसभा अध्यक्ष से स्टाफ ने मिलने नहीं दिया

रीटा ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष व सांसद सुमित्रा महाजन से भी मिलने गए थे। स्टाफ कर्मचारियों ने आवेदन लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। रीटा का आरोप है कि तत्कालीन सीएसपी अजय जैन की वजह से मामले की जांच समय पर नहीं हो पाई। जब भी टीआई आरोपित और मामले से जुड़े लोगों को बुलाकर पूछताछ करने का प्रयास करते, सीएसपी थाने पहुंचकर आरोपितों से पूछताछ करने से रोक देते थे।

ट्विंकल के माता-पिता का कहना है कि तत्कालीन टीआई दीक्षित और सोनी ने कई बार खुलकर बताया कि केस को आगे नहीं बढ़ाने का उन पर दबाव है। हालांकि इसके बाद भी दोनों ने हरसंभव मदद की है। बीईओएस टेस्ट के दौरान आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। घर का टीवी, फ्रिज, बेटी के जेवर तक बिक गए थे। उस समय तारेश सोनी ने अपने पास से रुपए देकर जांच के लिए भेजा था।

बेटी को सपने दिखाकर करोतिया ने उठाया फायदा

रीटा ने बताया कि बेटी महत्वाकांक्षी थी। उसे राजनीति में नाम कमाने की ललक थी। इसी का फायदा उठाकर जगदीश ने उसके साथ ज्यादती की। दुष्कर्म के बाद बेटी ने घर से निकलना बंद कर दिया था। इस पर करोतिया घर पर धमकाने आ गया था। करोतिया के खिलाफ थाने पर केस दर्ज करने की बात होने पर समाज के लोगों ने बीच-बचाव करके समझौता करवा दिया था। एक साल पहले डीआईजी और एसपी को पूरी घटना लिखित में सौंपी थी। इसके बाद भी जांच नहीं की गई।

समझौता करने के लिए रिश्तेदारों को धमकाया

संजय ने बताया कि केस दर्ज होने के बाद करोतिया परिवार के सदस्य रिश्तेदारों को धमकाते थे। उन पर समझौता करने का दबाव बनाते थे। करोतिया के परिवार के सदस्य ने बेटे पर क्रिकेट ग्राउंड पर हमला किया था। डर के कारण समाज के किसी भी सदस्य ने कभी साथ नहीं दिया। यह भी शंका है कि करोतिया ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए बेटी पर दबाव बनाकर उसे कई रसूखदारों के पास भेजा है। बेटी दुष्कर्म होने के बाद उससे शादी करना चाहती थी। केस में समझौता करने के लिए करोतिया चार बार घर आकर धमका चुका था। आरोपों के बारे में पूर्व विधायक गुप्ता से प्रतिक्रिया चाही गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

करोतिया किसी पद पर नहीं

भाजपा नेता जगदीश करोतिया की गिरफ्तारी के बाद भी भाजपा से उसके निलंबन पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। इस बारे में भाजपा नगर अध्यक्ष गोपी नेमा का कहना है कि करोतिया संगठन के किसी पद पर नहीं है। वह पार्टी का कार्यकर्ता है। यदि कोर्ट उसे दोषी मानती है तो संगठन भी आगे की कार्रवाई करेगा।