6 लाख किसानों को कर्ज माफी, खजाने पर बढ़ेगा 5000 करोड़ का बोझ

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भोपाल से वैभव श्रीधर। कांग्रेस के मास्टर स्ट्रोक कर्ज माफी का दायरा अब और बढ़ने वाला है। इसकी कट ऑफ डेट 31 मार्च से बढ़ाकर 30 नवंबर की जा सकती है। यदि यह फैसला हो जाता है तो लगभग छह लाख किसान और लाभान्वित होने वालों में जुड़ जाएंगे लेकिन करीब पांच हजार करोड़ रुपए का बोझ सरकार पर और बढ़ जाएगा। इस दायरे में वे किसान भी आएंगे जो शिवराज सरकार की ब्याज माफी योजना का फायदा उठा चुके हैं। हालांकि, इसमें सिर्फ वे किसान ही लाभान्वित होंगे, जिन्होंने अल्पावधि कृषि ऋण लिया है।
कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कालातीत और नियमित कर्ज लेने वाले किसानों का दो लाख रुपए का कृषि ऋण माफ करने का वादा किया है। सरकार में आते ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहला आदेश कर्ज माफी का निकालकर अपनी मंशा भी साफ कर दी पर जो कट ऑफ डेट (31 मार्च 2018) तय की गई, उस पर ज्यादातर मंत्रियों की सहमति नहीं है। कैबिनेट की दूसरी बैठक में ही मंत्रियों ने पार्टी के ‘वचन’ को जस का तस निभाने की पैरोकारी की।

सबकी राय देखते हुए मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को परीक्षण करने के निर्देश दे दिए। अधिकारियों ने आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है पर मोटे तौर पर यह माना जा रहा है कि कट ऑफ डेट 30 नवंबर 2018 रखी जाती है तो लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या बढ़ेगी और सरकार के ऊपर वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा। हालांकि, सरकार फिलहाल खर्च के दबाव की चिंता नहीं कर रही है।

दरअसल, उसकी नजर लोकसभा चुनाव पर भी है। प्रदेश में अभी मात्र तीन लोकसभा सीटें ही कांग्रेस के हाथ में है, इसलिए वो ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएगी जो उसके फैसलों पर किसी को भी सवाल उठाने का मौका दे। वैसे भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एलान कर चुके हैं कि यदि सभी किसानों को कर्जमाफी नहीं दी गई तो सड़क पर उतरेंगे। कृषि, सहकारिता और वित्त विभाग के पास अभी तक सितंबर 2018 तक के कर्ज से जुड़े आंकड़े उपलब्ध हैं। इसके हिसाब से 50 हजार 844 करोड़ रुपए का कर्ज राष्ट्रीयकृत, सहकारी और ग्रामीण विकास बैंकों ने 38 लाख 39 हजार किसानों को बांटा है।