निगम उपायुक्त को भी नहीं छोड़ा, गाड़ी पार्क करते ही माइंडटेक के कर्मचारी ने मांगे 20 रुपए

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भोपाल . शहर में स्मार्ट पार्किंग का संचालन कर रही माइंडटेक कंपनी के कर्मचारी ही अवैध वसूली में लिप्त हैं। नगर निगम के उपायुक्त मिलिंद ढोेके गुरुवार शाम को एमपी नगर में ज्योति काॅम्प्लेक्स पहुंचे। यहां मौजूद चुन्नीलाल ने ढोके से 20 रुपए मांग लिए।

जब मामला थाने पहुंचा तो यहां माइंडटेक कंपनी के प्रतिनिधि संजीव कुमार ने पहले स्वीकारा कि चुन्नीलाल उनकी कंपनी का कर्मचारी है, लेकिन निगम अफसरों से चर्चा के बाद उन्होंने इनकार कर दिया। थाने में भी कंपनी ने यही पत्र दिया है कि चुन्नीलाल उनका कर्मचारी नहीं है।

इस गफलत में एमपी नगर पुलिस ने निगम के आवेदन पर एफआईआर दर्ज करने की बजाय इसे जांच में शामिल कर लिया। ढोके खुद पार्किंग के प्रभारी हैं। माइंडटेक कंपनी के पास मिलन नमकीन और उसके सामने पार्किंग का कांट्रेक्ट है। लेकिन यहां लगा कर्मचारी ज्योति काॅम्प्लेक्स पर भी वसूली कर रहा था। ढोके यहां स्थित एक रेस्तरां पहुंचे।

चुन्नीलाल ने गाड़ी लगवाई। ढोके के अनुसार उसने गाड़ी लगाते ही 20 रुपए की डिमांड कर दी। इसके बाद उन्होंने निगम स्टाफ को बुला कर उसके खिलाफ एफआईआर कराने को कहा। निगमकर्मियों ने माइंडटेक कंपनी के अफसरों को भी मौके पर बुला लिया।

यहां पहुंचे संजीव कुमार ने थाने में पुलिसकर्मियों के सामने स्वीकारा कि यह उनका कर्मचारी है। थोड़ी देर बाद कंपनी की असिस्टेंट मैनेजर सोनिया पाठक भी मौके पर पहुंच गई। सोनिया और संजीव कुमार थाने से निकले और थोड़ी देर बाद लेटर दे दिया कि चुन्नीलाल उनका कर्मचारी नहीं है।

कंपनी ने जो लिखकर दिया है, वही माना जाएगा

^माइंडटेक कंपनी ने जो लिख कर दिया है, प्रथमदृष्ट्या वही सही माना जाएगा। जिस स्थान पर यह आदमी वसूली कर रहा था वह अधिकृत पेड पार्किंग स्थल नहीं है। मामला पुलिस के पास है, वहीं इसकी जांच होगी। – मिलिंद ढोके, उपायुक्त (नगर निगम)

चुन्नीलाल हमारा कर्मचारी नहीं : चुन्नीलाल हमारा कर्मचारी नहीं है। उसके कार्ड में कंपनी की सील नहीं है और साइन भी नहीं है। इसके अलावा हमारे कर्मचारी यूनीफार्म में होते हैं और उनके पास हमारी मशीन भी होती है। चुन्नीलाल के पास न मशीन मिली है और न वो यूनीफार्म में था। हमें नहीं पता कि उसका कार्ड कैसे बना। – सोनिया पाठक, असिस्टेंट मैनेजर, माइंडटेक

मुझे नहीं पता कि यहां पर पार्किंग की वसूली नहीं करना है। हमने तो साहब की गाड़ी लगवाई, पैसे की कोई बात ही नहीं हुई थी। माइंडटेक कंपनी ने ही परिचय पत्र बनाया था। मैं अफसरों का नाम नहीं जानता। मुझे नहीं पता कि कंपनी वाले अब मना क्यों कर रहे हैं? – चुन्नीलाल