नाथ, सिंधिया और दिग्विजय के बीच गृह, वित्त और परिवहन पर उलझा विभागों का बंटवारा

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भोपाल. शपथ ग्रहण के 48 घंटे बाद भी नई सरकार के 28 कैबिनेट मंत्रियों को विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया है। बुधवार को सुबह से लेकर देर रात तक चली माथापच्ची के बावजूद कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के बीच वित्त, गृह और परिवहन विभाग को लेकर मामला फंसा रहा। अब ये मामला दिल्ली दरबार में पार्टी आलाकमान के पास पहुंच गया है। सिंधिया ने इस मसले पर पार्टी कोषाध्यक्ष अहमद पटेल से भी बात की। सिंधिया इससे पहले अपने गुट के लिए उप मुख्यमंत्री का पद भी चाहते थे और यह मामला भी दिल्ली में ही सुलझा था। अब विभाग भी वहीं बंटेंगे। दरअसल पेंच गृह को लेकर है। नाथ जहां बाला बच्चन को ये विभाग देना चाहते हैं तो सिंधिया गृह और परिवहन तुलसी सिलावट को दिलवाने पर अड़े हैं। दिग्विजय वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर डॉ. गोविंद सिंह को गृह के लिए योग्य मान रहे हैं। साथ ही बेटे जयवर्धन को वित्त दिलाना चाहते हैं।

मंत्री ही रहेंगे विभाग के सर्वे-सर्वा
सभी को कैबिनेट मंत्री बनाने के पीछे दिग्विजय को मुख्य किरदार माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल गठन से पहले दिग्विजय ने दलील रखी थी कि कैबिनेट और राज्यमंत्री के बीच काम का बंटवारा होने से जनता से जुड़े काम नहीं हो पाते। इसलिए मंत्री ही विभाग का सर्वे-सर्वा रहे और सरकारी काम आसानी से हो सके। कैबिनेट की बैठक में भी नाथ ने इस बात के संकेत दिए कि अब विभाग मुख्यमंत्री कार्यालय से नहीं, मंत्री ही उसे चलाएंगे।

कांग्रेस के सामने इन तीन उलझन से निपटना चुनौती
तीनों दिग्गज सीट बंटवारे से लेकर मंत्रियों के नाम तय होने तक असहमति रही। अंत में दिल्ली दरबार में ही मामला सुलझा।
कमलनाथ ने एक साथ 28 कैबिनेट मंत्री बना दिए। इससे बाकी बड़े विधायकों को एडजस्ट करने में पेंच फंस रहा है।
सरकार को समर्थन देने वाले बसपा, सपा और तीन निर्दलीयों ने विरोध तेज कर दिया है। उनके लिए जगह बनानी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो कमलनाथ ने बुधवार को विभागों के बंटवारे को लेकर सिंधिया से भी फोन पर बात की। नाथ और दिग्विजय के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर देर रात तक चर्चा चलती रही। कमलनाथ की ओर से कहा गया है कि यदि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अच्छे नतीजे चाहिए तो उन्हें फ्री हैंड देना होगा। दिग्विजय को बुधवार शाम दिल्ली जाना था, लेकिन उन्होंने अपना तय कार्यक्रम रद्द कर दिया।

सूत्रों के अनुसार ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में सचिव कमलेश्वर पटेल, जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को राहुल गांधी के कोटे से ही मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। इसलिए इन तीनों को दिल्ली से महत्वपूर्ण विभाग दिए जाने के संकेत हैं। चर्चा यह भी है कि वरिष्ठ विधायकों केपी सिंह, बिसाहूलाल सिंह और ऐदल सिंह कंसाना की नाराजगी का मामला एक दो दिन में निपटाया जा सकता है। इसके बाद ही विभागों का बंटवारा होगा।

इधर, कमलनाथ मंत्रिमंडल में शामिल होने से रह गए कांग्रेस के वरिष्ठ विधायकों बिसाहूलाल सिंह और ऐदल सिंह कंसाना का गुस्सा एक दिन बाद ही बुधवार को फूट पड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय से मिलने पहुंचे बिसाहूलाल तो फूट-फूट कर रोने लगे। बंद कमरे में दिग्विजय ने उन्हें ढाढस बनाया। वहीं सुमावली से विधायक कंसाना ने सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को दोषी ठहराते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने ही मेरा नाम सूची से कटवाया। उन्होंने कहा कि मेरे साथ केपी सिंह, बिसाहूलाल के नाम भी मंत्रियों की सूची से सिंधिया ने ही हटवाए।