शादी के लिए आए फूलों से सजी ‘स्निग्धा’ की अर्थी, काश! पापा ने मान ली होती बात…

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पटना। जिन फूलों से मंडप सजना था, उनसे स्निग्धा की रविवार को अर्थी सजी। शनिवार को उसके तिलक की रस्म हुई थी। रविवार को मंडप था और सोमवार को शादी होनी थी। मंडप और घर को सजाने के लिए फूल मंगाए गये थे। शव शास्त्रीनगर थाने के पटेलनगर इलाके के स्नेही पथ स्थित उसके घर चंद्र विला लाया गया।
शव को अंतिम यात्रा पर ले जाया जाने लगा तो उसी फूल से उसकी अर्थी को सजाया गया जिससे मंडप सजाया जाने वाला था। जैसे ही फूलों से सजी स्निग्धा की अर्थी घर से निकली मोहल्ले वालों की आंखों से आंसू बहने लगे। घर के लोग और रिश्तेदार फफकने लगे।
तिलक की रात जमकर किया था डांस

स्निग्धा ने शनिवार को तिलक समारोह पर खूब डांस किया था। नाते-रिश्तेदारों के साथ हंसी-ठिठोली भी की थी। इतना ही नहीं, उसने सहेलियों और परिवार की महिलाओं के साथ बैठकर दोनों हाथों में मेहंदी भी रचवाई थी। उसके व्यवहार में किसी तरह का बदलाव नजर नहीं आया।
डॉ. स्निग्धा सिलीगुड़ी से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद कोलकाता में एमएस कर रही थी। सूत्रों की मानें तो सिलीगुड़ी में आइआइटियन लड़के से उसकी दोस्ती हो गई थी। दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे और शादी करना चाहते थे, परंतु लड़के के दूसरी बिरादरी से होने के कारण घर वाले राजी नहीं थे।

परिवार वालों ने स्निग्धा की शादी किशनगंज के डीएम महेन्द्र कुमार से तय कर दी थी। सुधांशु दरभंगा से रिटायर हुए थे। इसके पहले वे शाहाबाद के डीआइजी थे। इनके बड़े दामाद धर्मेंद्र कुमार भी आइएएस हैं। वह मुजफ्फरपुर के डीएम रह चुके हैं।