परीक्षा दो या न दो, 25 हजार में 10वीं और 30 हजार रुपए में 12वीं पास होने की गारंटी

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भोपाल. सीबीएसई और माध्यमिक शिक्षा मंडल के समकक्ष माने जाने वाले नेशनल इंस्टीट्‌यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं पास करने का खुले में सौदा हो रहा है। दलाल 25 हजार रुपए में 10वीं और 30 हजार रुपए में 12वीं पास करने की गारंटी दे रहे हैं। परीक्षा दिए बिना भी पास होने की गारंटी मिल रही है। जुलाई में एनआईओएस मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद खुद सीबीआई के अधिकारियों ने अलग-अलग दलालों से संपर्क किया तो उन्हें भी 25 से 30 हजार रुपए में पास होने की गारंटी दी गई।

अब तक सीबीआई ने इस मामले में मध्यप्रदेश के अलावा असम, ओडिशा, हरियाणा, दिल्ली के 1800 छात्रों, बिचौलियों और एनआईओएस के अधिकारियों को आरोपी बनाया है। खास बात यह है कि दलालों ने इस गोरखधंधे का केंंद्र मध्यप्रदेश को बनाया हुआ है।

सीबीआई अधिकारियों का कहना है कि यह जांच का विषय है कि मध्यप्रदेश के रीजनल सेंटर में देश के बाहर के छात्रों के नामांकन कैसे हो गए? सीबीआई ने दो दिन पहले इस मामले में भोपाल, सीहोर, उमरिया और रतलाम के स्टडी सेंटरों सहित देशभर के छह राज्यों के 26 ठिकानों पर छापामार कार्रवाई की है। सीबीआई ने इस मामले में श्यामला हिल्स स्थित एनआईओएस के रीजनल सेंटर से भी कुछ दस्तावेज प्राप्त किए हैं। इससे सीबीआई यह जानने की कोशिश कर रही है कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई?

अटेंडेंस शीट कहां बनी, कॉपी कहां छपवाईं :

सीबीआई ने गुवाहाटी स्थित रीजनल सेंटर से यह पता किया है कि जिन 1800 छात्रों को बिना परीक्षा दिए पास किया गया है, उनकी कॉपियों पर ओरिजनल लोगो नहीं था। इन कॉपियों के साथ भेजी गई अटेंडेंस शीट भी फर्जी तरीके से तैयार की गई थी।

ऐसे में सीबीआई अब यह पता कर रही है कि फर्जी अटेंडेंस शीट किसने बनवाई और एनआईओएस के लोगो वाली कॉपी कहां छपवाई गई। अब सीबीआई अपनी जांच में इस बात पर गंभीरता से फोकस कर रही है कि देशभर के राज्यों के छात्रों काे पास कराने के लिए मध्यप्रदेश ही क्यों चुना गया? अब तक छह राज्यों के छात्रों कोे फर्जी तरीके से पास कराए जाने के प्रमाण मिल चुके हैं। सीबीआई को आशंका है कि इस फर्जीवाड़े का दायरा और भी बड़ा हो सकता है।

इस मामले में सीबीआई को बैतूल निवासी आशीष की तलाश :
सीबीआई की अब तक की जांच में फर्जीवाड़े का केंद्र दिल्ली का मयूर विहार सामने आ रहा है। मयूर विहार के एक कोचिंग संस्थान के संचालक आशीष मसीह की सीबीआई को तलाश है। अलग-अलग ठिकानों पर हुई छापेमारी से मिले दस्तावेजों में आशीष का नाम सामने आया है। सीबीआई ने दिल्ली में उसके ठिकानों पर भी दबिश दी है, लेकिन वह सीबीआई के हाथ नहीं आया है। सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि आशीष मसीह मूलत: मध्यप्रदेश के बैतूल का रहने वाला है। 2014 में बैतूल में वह स्टडी सेंटर चलाता था, उस दौरान भी वहां परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी।

आशीष ने इंस्टीट्यूट की आड़ में ही बनाया होगा दलालों का नेटवर्क :
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि आशीष मसीह मयूर विहार में ही अास्कर पॉलिटेक्निक नाम से एक इंस्टीट्यूट चलाता है। आशंका है कि इसी इंस्टीट्यूट की आड़ में उसने दलालों का नेटवर्क तैयार किया है। इसके बाद मध्यप्रदेश में रीजनल सेंटर में अपने रिश्तों का फायदा उठाकर उसने देशभर के दलालों से 10वीं और 12वीं की परीक्षा पास कराने के लिए सौदे किए। हालांकि भोपाल रीजनल सेंटर के अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। उनका यही कहना है कि जिन लोगों के कार्यकाल के दौरान गड़बड़ी हुई, वे अब यहां पदस्थ नहीं हैं। पूरा स्टाफ नया है।

सीबीआई को जुलाई 2017 में मिली थी शिकायत :

सीबीआई ने अभी सिर्फ अप्रैल 2017 में हुई परीक्षा के मामले में ही एफआईआर दर्ज की है, लेकिन छापे के दौरान इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि यह गड़बड़ी पिछले सालों में भी हुई है। ऐसे में सीबीआई अब पिछले सालों के दस्तावेजों की भी छानबीन में जुट गई है। जुलाई 2017 में सीबीआई को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से एक पत्र भेजकर एनआईओएस परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी दी गई थी। प्रारंभिक जांच के बाद सीबीआई ने इसमें एफआईआर दर्ज की और दो दिन पहले इससे जुड़े आरोपियों के यहां एक साथ छापा मारा।