प्रदेष में बिजली खरीदी में भी 2 लाख करोड़ रू. के घोटाले हुए- अरूण यादव

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नसरूल्लागंज/ बुधनी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चौहान के खिलाफ चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याषी अरूण यादव ने गुरूवार को अपने सघन जनसंपर्क अभियान में अपने प्रतिद्वद्वी षिवराज सिंह चौहान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिस भाजपा सरकार के रहते शौचालय के निर्माण मे भी 1500 करोड़ रूपयों का भ्रष्टाचार हुआ हांे, बिजली खरीदी में 2 लाख करोड़ रूपयों के घोटाले हुए हों, उसके मुखिया अपने मुह से किस ईमानदार मूल्यों की दुहाई दे रहे है ? ‘‘शौचालय‘‘ भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा सरकार मे बैठे लोगों का स्तर समझा जा सकता है ? श्री यादव ने कहा कि जब राज्य सरकार स्वयं प्रतियूनिट 2 रू. 57 पैसे बिजली का उत्पादन कर सकती हैं, तब पिछले 15 वर्षो में बिना टेण्डर के निजी कम्पनियों से 6-7 रू. प्रति यूनिट की दर से मंहगी बिजली कब-कब, कितनी, और कितनी धन राषि की बिजली खरीदी गई ? क्या यह भी सच नही है कि निजी कम्पनियों से बिजली खरीदने के लिए सरकारी पावर प्लांटो में जान बूझकर उत्पादन ठप्प रखा गया? क्या यह भी गलत है कि मध्यप्रदेष में बिजली अन्य राज्यों की तुलना में अत्याधिक मंहगी है, और जिसकी दर 3.5 रू. अधिक है।
श्री यादव ने कहा कि षिवराजसिंह चौहान प्रदेष में बिजली को लेकर आत्मनिर्भर होने की बात कर रहे है। जबकि हकीकत यह है कि किसानों को 6 से 8 घंटे तक भी बिना अवरोध के जहां बिजली उपलब्ध नही हो रही है। वही गरीब और आम उपभोक्ताओं को अनाप शनाप बिजली के बिल दिये जा रहे है। प्रदेष में 60 हजार किसानों के विरूद्ध बिजली चोरी के प्रकरण दर्ज किये गये। श्री षिवराजसिंह ने इन किसानों के प्रकरण वापस लिये जाने की बात कही थी किंतु वह भी एक शाब्दिक जुमला ही शाबित हुई! क्या कारण रहा कि कुछ वर्षो पहले जैेत गांव के ही एक प्रतिष्ठित और प्रभावी परिवार में तारों से बिजली चोरने का वर्षो तक दुःसाहस किया गया। प्रदेष के प्रमुख दैनिक ने उसका पृथम पृष्ट पर फोटो भी प्रकाषित किया था। किंतु उसके विरूद्ध सालों बीत जाने के बाद भी बिजली चोरी का प्रकरण दर्ज नही किया।किसानो के खिलाफ चोरी का प्रकरण दर्ज किया जाना और प्रभावी परिवार को इस चोरी से अनदेखा कर देना किस ईमानदारी का संकेत है?
श्री यादव ने कहा कि प्रदेष में बिना टेण्डर के करोड़ों रूपयों की बिजली खरीदी गई जिसे लेकर लोकायुक्त संगठन ने मामला लंबित है उसकी जांच कहां तक पहुंची और उसका क्या हुआ। अटल ज्योंति अभियान भी उपभोक्ताओं को सिर्फ मूर्ख बनाने का अभियान था इससे उपभोक्ताओं का कोई भी लाभ नही हुआ।