अलीराजपुर में अनोखी शादी , एक ही मंडप में दुल्‍हा एक और दुलहने दो, दोनों के नाम भी एक जैसे

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सुरेद्र बागद्रे आलीराजपुर ।
यहां एक युवक ने दो लडकियों से एक साथ शादी की है , दोनों ही पत्नियों का नाम भी एक ही शर्मिला , तीनों ने सात फेरे लिए तो पूरा गांव गवाह बना ,अब तीनों साथ-साथ हैं। शिकायत न होने से कानून के भी हाथ बंधे हैं तो समाज ने भी इस विवाह का स्वागत किया है।alirajpur ---anokhi shadi --05

जी हां, मध्‍यप्रदेश के अलीराजपुर जिले में आदिवासी क्षेञ के लोग अपनी मान्‍यताओं के लिए जग जाहरि है। जिसके चलते अलिराजपुर के एक गांव में एक युवक ने एक ही नाम की दो प्रमिकाओं को अपने प्रेमपाश में फंसा कर विवाह रचाया है। दोनो बीबीयां बकायदा पति रतु के साथ सुखी जीवन भी व्‍यतीत कर रही है । अब से कुछ दिन पूर्व ही ग्रम बोरगढ में एक शादी सम्‍पनन हुई है। जिसमें एक मंडप, एक दूल्हा लेकिन दुल्हनें दो , जिनके नाम भी किश्‍मत के चलते एक ही समान , दोनों दुल्‍हनो के नाम पति रतु के भाग्‍य से एक ही है नाम है ‘शर्मिला’। दोनों पत्नियों के साथ सात फेरे लिए तो पूरा गांव गवाह बना, अब तीनों साथ-साथ हैं। एक आदमी द्वारा दो दो पत्नियों से विवाह करने की शिकायत न होने से कानून के हाथ बंधे हैं , तो समाज ने भी इस विवाह का स्वागत किया है।
मामला मध्य प्रदेश के आलीराजापुर जिले के बोरखड़ कस्बे का है। गति दिनोँ रतु पिता दशरिया (23) ने अपनी दो प्रेमिकाओं के साथ सात फेरे लिए। रतु मजदूरी करता है। करीब तीन साल पहले उसे ग्राम पलासदा की शर्मिला से प्यार हो गया था, बाद में उसे भगा लाया और पत्नी की तरह रखने लगा, दो बच्चे भी हो गए। पिछले साल अजंदा गांव की मजदूर युवती शर्मिला से भी दोबारा इश्क हो गया। उसे भी ले आया और दोनों को पत्नी की तरह रखने लगा। बस रस्म निभाकर सामाजिक मान्यता अब दी है।
इस समाज की परंपराएं अलग
अभिभाषक संघ के पूर्व अध्यक्ष राजेश राठौर का कहना है कि आदिवासी समाज की मान्यताएं, जो इन्हें हिंदू विवाह अधिनियम से अलग करती हैं। समाज में ऐसे विवाहों की सामाजिक मान्यताएं भी हैं। यह सही है कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत इस तरह के विवाह गैर कानूनी हैं।
हो जाती है शादीयां

प्रदेश के अधिकांश आदिवासी क्षेञों में हिन्‍दु रितीरिवाज से विवाह तो किया जाता है लेकिन शुभ महुर्त का इंतजार नही किया जाता, आदिवासी समाज में शादी के मिलान की परंपरा हिन्‍दु या अन्‍य समुदाय की तुलना में अलग है। कहा जाता है कि चावल की नोक मिलाकर शादी की तारीख आपस में बैठकर तय की जाती है। सा‍थ ही हम बता दें कि इस प्रकार के विवाह को कानूनी मान्‍यता भी मिली हुई है।