अ‍ाखिर एक युवक 10 साल से क्‍यों था घ्‍ार में कैद होशंगाबाद एसपी के निर्देश के बाद पुलिस ने कराया मुक्‍त

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मुकेश अवस्‍थी

होशंगाबाद जिले की सोहागपुर तहसील में एक अजीब बाकया सामने आया है। जिसके चलते 45 वर्षीय युवक शंकर राठौर पिछले 10 सालों से खुद के ही घर में कैद रह कर तिल तिल की जिन्‍दगी जी रहा था। जिसे बुधवार की सुबह से शुरू की गई पहल के बाद दोपहर में पुलिस की मदद से मुक्‍त करवाकर अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। जब शंकर के बडे भाई से उसके बारे में पूछा गया तो उसने उसे मान‍शिक बीमार बताया।

जी हां क्‍या कोई आदमी 10 साल तक खुद को कैद कर घ्‍ार में जिन्‍दा रह सकता है, शायद नही। लेकिन होशंगाबाद जिले की सोहागपुर तहसील के अम्‍बेडकर वार्ड में रहने वाले भुजबल सिंह राठौर का छोटा भाई शंकर राठौर जानवरों से बदतर जिन्‍दगी जी रहा था। जिसे बुधवार को मीडियाकर्मीयों और वार्ड के पार्षद की मदद से मुक्‍त करवा दिया । शंकर जिस झोपडी में जानवरों की तरह टूटे पलंग पर पडा था , उसमें मकडी के जाले भी लगे थे । साथ ही उसके भाई द्वारा उसे मानशिक बीमार बताया गया, लेकिन जब शंकर से मौके पर बात की गई तो उसने ठीक ठाक बता की और बताया कि वह बीए पास है। शंकर ने पिछले 10 सालों से रोशनी नही देखी थी, न ही उसने कई सालों से नहाया था, भाई द्वारा उसे ऐसे बर्तनों में खाना दिया जाता है जिन्‍हे कई सालों से साफ भी नही किया गया होगा।

अपनी मर्जी से हुआ है कैद – या अघोरी बाबा के कहने पर

शंकर का बडा भाई भुजबल राठोर उसकी पत्नि जनक कुमारी के साथ पक्‍के मकान में रहता है साथ ही उसकी पत्नि‍अम्‍बेडकर वार्ड में आंगनबाडी कार्यकर्ता है, भुजबल का कहना है कि शंकर अब से करीब 10 साल पहले देवास में की किसी फैक्‍टी में काम करता था, जहां उसे कोई अघोरी बाबा मिल गया था जिसके कहने पर शंकर ने खुद को घर में ही कैद कर लिया साथ ही शंकर मानशिक बीमार भी है । लेकिन शंकर के भाई भुजबल की ये कहानी किसी के गले नही उतर रही है, शंकर किसी भी तरह से मानशिक बीमार नही है। सवाल यह उठता है कि यदी शंकर किसी भी तरह से बीमार था तो उसके भाई द्वारा उसका इलाज क्‍यों नही कराया गया और नही कभी अस्‍पताल भेजा गया । शंकर के घर के आसपास रहने वालों ने बताया कि उन्‍होने शंकर को कई सालों बाद आज देखा है , उनके अनुसार खुद शंकर ने ही उसे ज्‍यादाद के के मामले में कैद कर रखा है।

मां भी है बीमार –

शंकर की हालत उसकी मां के बीमार होने के बाद से ज्‍यादा नाजुक हो गई, मां धनकुवंर वाई भी लकवा से पीडित है, उसके अनुसार शंकर पहले अच्‍छा था। धनकुवंर वाई का पति चैन सिंह वन विभाग में पदस्‍थ है जिसके मौत के बाद धनकुवंर बाई को उसकी पेंशन भी मिलती है, जिसे लेने के लिए ही भुजबल द्वारा उसे बाहर निकाला जाता है।

10 साल से नही कटे बाल , 3 साल से नहाया भी नही

कैद में रह रहे शंकर के बाल पिछले 10 सालों से काटे नही गए, न ही उसे पिछले 3 सालों से नहलाया गया। जब पुलिस की मदद से 108 ऐम्‍बुलेंस बुलाकर उसे अस्‍पताल भेजा गया तो वहां उसे वार्ड पार्षद मोहन कहार और उनके सहयोगी श्‍ाहीद खान की मदद से बाल कटवाए गए तो उसके सिर से करीब 3 किलों को गुच्‍छा निकला। वही उसे जिन्‍तेंद्र महोरिया, हेंमंत और योगेश नाम के तीनों युवकों द्वारा अस्‍पताल में ही नहलाया गया।

बाबई के पास धनाश्री में है पुस्‍तैनी जमीन।

जानवरों से भी बदतर जिन्‍दगी से मुक्‍त हुए शंकर के पास पुस्‍तैनी जमीन भी है, जो बाबई ब्‍लाक के ग्राम धनाश्री में है। जिसका रकबा करीब 8 एकड बताया जा रहा है, लोगों के अनुसार शंकर के बडे भाई की नजर उसकी जमीन पर है। जिसके चलते वह उसे कैद कर पूरी जमीन पर कब्‍जा किए हुए है। लोगों का कहना है कि शंकर के न रहने पर पूरी जमीन का मालिक भुजबल ही हो जाएगा , इसलिए पहला संदेह तो भुजबल रठौर के उपर ही जाता है।

इनका कहना है।

एसपी महोदय के निर्दश पर शंकर को कैद से मुक्‍त करवार कर अस्‍पताल भेजा गया है। वह अभी शदमें में है, कुछ बोलन की हालत में नही है। जब वह बयान देगा उसके अनुसार कार्यवाही की जाएगी।
राजेंद्र बर्मन
थाना प्रभारी सोहागपुर
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